Maine Puchhaa Chaaand Se / मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं / Abdullah (1980)

Maine Puchhaa Chaaand Se Ke Dekhaa Hai Kahin, Mere Yaar Saa Hasin

मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं, मेरे यार सा हसीं
चाँद ने कहा चाँदनी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैंने पूछ चाँद से …

खूब्सूरती जो तूने पाई
लुट गई ख़ुदा की बस ख़ुदाई
मीर की ग़ज़ल कहूँ तुझे मैं
या कहूँ ख़याम की रुबाई
मैं जो पूछूँ शायरों से ऐसा दिलनशीं
कोई शेर है कहीं
शायर कहे शायरी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैंने पूछा चाँद से …

मैंने ये हिजाब तेरा ढूँढा
हर जगह शबाब तेरा ढूँढा
कलियों से मिसाल तेरी पूछी
फूलों में जवाब तेरा ढूँढा
मैंने पूछा बाग़ से फ़लक़ हो या ज़मीं
ऐसा फूल है कहीं
बाग़ ने कहा हर कली की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैंने पूछा चाँद से …

हो चाल है कि मौज की रवानी
ज़ुल्फ़ है कि रात की कहानी
होंठ हैं कि आइने कँवल के
आँख है कि मय्क़दों की रानी
मैंने पूछा जाम से फ़लक़ हो या ज़मीं
ऐसी मय भी है कहीं
जाम ने कहा, मय्कशी की क़सम
नहीं, नहीं, नहीं
मैंने पूछा चाँद से …


  • फिल्मः अब्दुल्ला (1980)
  • गायक/गायिकाः मोहम्मद रफ़ी
  • संगीतकारः आर. डी. बर्मन
  • गीतकारः आनंद बख्शी
  • कलाकारः संजय खान, जीनत अमान


Maine-Puchhaa-Chaaand-Se-Abdullah (1980)


मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं, मेरे यार सा हसीं

Maine Puchhaa Chaaand Se Ke Dekhaa Hai Kahin, Mere Yaar Saa Hasin
Chaaand ne kahaa, chaaandani ki kasam, nahin, nahin, nahin

Maine ye hijaab teraa dhuandhaa, har jagah shawaab teraa dhuandhaa
Kaliyon se misaal teri puchhi, fulon men jawaab teraa dhuandhaa
Mainne puchhaa baag se फ़alak ho yaa jmin, aisaa ful hai kahin
Baag ne kahaa, har kali ki kasam, nahin, nahin, nahin

Chaal hai ke mauj ki rawaani, julf hai ke raat ki kahaani
Hothh hain ke aine knwal ke, aankh hai ke mayakadon ki raani
Mainne puchhaa jaam se, falak ho yaa jmin, aisi may bhi hai kahin
Jaam ne kahaa, mayakashi ki kasam, nahin, nahin, nahin

Khubasurati jo tune paai, lut gi khudaa ki bas khudaai
Mir ki gjl kahuan tujhe main, yaa kahuan khyaam hi rubaai
Mene jo puchhu shaayaron se aisaa dilanashi koi sher hai kahin
Shaayar kahen, shaayari ki kasam, nahin, nahin, nahin





मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं, मेरे यार सा हसींMaine Puchhaa Chaaand Se Ke Dekhaa Hai Kahin, Mere Yaar Saa Hasin

Maine Puchhaa Chaaand Se / मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं / Abdullah (1980) Maine Puchhaa Chaaand Se  /  मैंने पूछा चाँद से कि देखा है कहीं /  Abdullah (1980) Reviewed by FM Hindi Song on दिसंबर 15, 2016 Rating: 5

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